
ननौता से रिपोर्टर पंकज कुमार
बाबा सिद्ध पीठ’ ग्राम सोना अर्जुनपुर पूरे देश में श्रद्धा भक्ति एवं दैहिक रोगों से मुक्ति दिलाने वाले चमत्कारिक उपचार केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध है। सिद्ध बाबा का भव्य मंदिर एवं स्नानगृह सरोवर के केन्द्र में स्थित है, जिसमें गठिया और बाय जैसे असाध्य रोगों से ग्रसित श्रद्धालु स्नान कर रोग मुक्त हो जाते हैं। ननौता के पास बसे इस गांव में सिद्ध बाबा के नाम पर कई स्कूल भी चलते हैं। लगभग 5 हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र में प्रत्येक शनिवार और रविवार को दूरदराज से अनेक गठिया और बाय रोगों से पीड़ित महिलाएं एवं पुरुष यहां पहुंचते हैं। और सरोवर में स्नान कर बाबा के दर्शन के उपरान्त दूध चढ़ाते हैं। सिद्ध बाबा के समीप ही सत्संग भवन है जहां श्रद्धालु बाबा सिद्ध पीठ की महिमा का संगीतमय गुणगान करते हैं। सरोवर में पीड़ित लोगों के स्नान के लिए एक घाट भी निर्मित कराया गया है, जिस पर नित्य प्रति चंदन का लेप किया जाता है।

सिद्ध पीठ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए। सिद्ध बाबा मंदिर के पुजारी अंकित ने बताया। कि बहुत पहले इस स्थान पर घने जंगल हुआ करते थे। एक दिन गोरखनाथ बाबा
के शिष्य बाबा सिद्ध यहां घूमने के लिए आये।और यहीं धूनी जमाकर तपस्या में लीन हो गये। बाबा के प्रिय शिष्य अपने गुरु के लिए दूध और भोजन का प्रबंध बाबा सिद्ध पीठ के संदर्भ में गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि हजारों साल पहले गोविंद ने इसी स्थान पर भगवान की तपस्या की थी। और योग शक्ति के बल पर इस स्थल को पवित्र किया था। गठिया और बाय जैसे असाध्य दिन भोजन के सिद्ध बाबा ने रोगों का चमत्कारी इलाज इसी सरोवर में जल समाधि ली थी। रखरखाव के लिए गठित एक समिति द्वारा बाबा के नाम से भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।

दूरदराज से आये हुए। श्रद्धालुओं के खाने पीने और ठहरने की व्यवस्था भी इसी समिति द्वारा की जाती है। करते थे। एक प्रबंध में देर होने। से बाबा ने अपनी छाती को चीरकर बाहर निकाल ली और तालाब में धोने लगे। उसी समय एक चरवाहे ने बाबा सिद्ध को ऐसा करते देख लिया। सिद्ध बाबा उसी समय उठकर साधना स्थल पर गये और भूमि में समा गये। उनके भूमि में समाते ही कुछ कागज निकाले, जिन पर कुछ लिखा हुआ था। चरवाहे ने उन कागजो को इकट्ठा कर उनमें आग लगा दी। ऐन उसी वक्त बाना का शिष्य आभाराम आ गया। अपने गुरु को न पाकर वह परेशान हो गया तभी चरवाहे ने उसे सारी बात बता दी। आभाराम ने आग में से बिना जले कुछ कागज निकाले जिनमें लिखा था कि जी भी भक्त इस तालाब में नहाकर मिट्टी का चंदन लगायेगा। उसका गठिया और बाय रोग दूर हो जायेगा। इसी के बाद गांव वालों ने इसी स्थान पर बाबा मंदिर की स्थापना की। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह में एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। बहुत। बड़ी तादाद में श्रद्धालु मंदिर में आते हैं और स्वास्थ्य लाभ उठाते हैं। सिद्ध बाबा का प्राचीन मंदिर भक्तों की आस्था का केन्द्र है। देश विदेश के चिकित्सक भी इस पीठ से लाभान्वित हो चुके हैं

