
रिपोर्ट वैभव गुप्ता।
कस्बे के श्री दिगम्बर जैन कन्या इंटर कालेज में ससंघ पधारे आचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज ने शनिवार को अपने प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए कहा कि हमारी आत्मा ही ईश्वर स्वरूप है जो हमें अच्छे बुरे कर्मों से दूर रहने का संकेत देती है मात्र उसे समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हम जो भी कर्म करते हैं उसके अच्छे या बुरे फल हमें ही भोगने पड़ते हैं। इसके अलावा हम जो भी धर्म करते हैं वह हमारे ही काम आता है किसी दूसरे का किया धर्म किसी अन्य के काम नहीं आता। धर्म के बिना मनुष्य की जीवन यात्रा अधूरी है। उन्होंने कहा कि धर्म ही मोक्ष मार्ग का साधन है। महाराज श्री ने प्रवचनों के बीच बीच में भजनों के माध्यम जीवन का सार समझाया। महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य अच्छे या बुरे कर्म करने से पहले उसके परिणाम भली भांति समझता है लेकिन फिर भी वह इसके परिणाम की चिंता किये बिना ही कर्म करता चला जाता है चाहे वे बुरे ही क्यों न हो। इसी को मानव प्रवर्ति कहते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सदैव अपने जीवन की नैया पार करने के लिए अच्छे कर्म करने चाहिए तभी मोक्ष मार्ग की प्राप्ति सम्भव हो सकेगी।
