
सहरसा
तीन दिवसीय दमगढ़ी विषहारा मेला का सोमवार से शुभारम्भ हुआ।जहां पूजा अर्चना के लिए दूर-दूर से श्रद्धालू पहुंचते है।हिंदू पंचांग के अनुसार नाग पंचमी सावन मास के शुक्ल पक्ष के पंचमी तिथि को मनाया जाता है।सौर प्रखंड के दमगढ़ी गांव स्थित मां विषहरी स्थान पिछले 150 वर्षों से लोगों के आस्था का केंद्र बना हुआ है।यहां वर्षों पूर्व से ही मां भगवती की अराधना की जा रही है। वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह तोमर ने बताया कि तोमर वंश के राजपूतों ने माता विषहरी को अपनी जमीन में जगह देकर भगवती के प्रति आस्था एवं विश्वास को अभी तक बनाये रखा है। राजपूतों ने इस मंदिर के पुजारी के रुप में कुम्हार जाति के लोगों को पुजारी बनाया। तबसे यह अद्भुत परंपरा कायम है। अद्भुत इसलिए कि जाति रूपी वैमनस्य परंपरा यहांं कभी जन्म नहीं ले सका। यह यहांं के राजपूतों की खासियत रही है। ऐसी मान्यता है कि भगवती को चढ़ाये जाने वाले जल को किसी विषधर के काटे जाने के बाद पीड़ित को पिलाया जाता है तो उस व्यक्ति की जान बच जाती है। यहां आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।मंदिर के पुजारी के अनुसार सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को वैरागन का दिन होता है। उस दिन मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालुओं द्वारा भगवती को पूजा-अर्चना कर छागर की बलि चढ़ायी जाती है। नागपंचमी के मौके पर मंदिर परिसर में तीन दिवसीय मेला लगता है।इस दौरान श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ उमड़ती है। आयोजित मेले में ग्रामीणों की भागीदारी से आगंतुक लोगों को किसी भी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं होती है।प्रशासनिक स्तर पर भी चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था रहती है। यहांं श्रद्धालु सिर्फ कोसी क्षेत्र के ही नहीं बिहार से सटे नेपाल के तराई क्षेत्र के भी भक्त सालों भर पूजा अर्चना करने आते हैं। माता विषहरी दमगढ़ी की महिमा अपरंपार है।