
- 100 रुपये वाली भंसार नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
मोतिहारी, राजन द्विवेदी।
भारत – नेपाल सीमा पर स्थित जिले के रक्सौल सहित अन्य सीमावर्ती इलाकों नेपाली भंसार मामले में राहत मिली है। पूर्व में नेपाल सरकार की 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर भंसार (कस्टम शुल्क) वसूली की नीति पर नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद भारत-नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में लोगों ने राहत की सांस ली है। हाल के दिनों में इस नीति को लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह चर्चा में रहे थे।
- सुप्रीम कोर्ट ने दिया अंतरिम आदेश
नेपाल के सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त इजलास ने शुक्रवार को अंतरिम आदेश जारी करते हुए 100 रुपये से अधिक के सामान पर भंसार वसूली की व्यवस्था के तत्काल क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि आम नागरिकों के दैनिक जीवन और गुजारे में बाधा पहुंचाने वाली कार्रवाई नहीं की जाए।
नेपाल सरकार की सख्ती के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग दैनिक उपयोग के सामान जैसे सब्जी, कपड़ा, राशन और दवाइयां लाने में परेशानी झेल रहे थे। सीमा चेकपोस्टों पर पूछताछ और सामान जब्त करने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं।सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब रक्सौल-वीरगंज समेत कई सीमा क्षेत्रों में लोग सामान्य रूप से घरेलू उपयोग की वस्तुएं ला सकेंगे।
- दायर की गई थी रिट याचिका
इस नीति के खिलाफ 27 अप्रैल को अधिवक्ता अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोग्य सिंह और प्रशांत विक्रम शाह ने सर्वोच्च अदालत में रिट याचिका दायर की थी। याचिका में इस व्यवस्था को अव्यावहारिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई थी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मधेश और तराई क्षेत्रों के लोग करीब दो महीने से कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। इसका असर रक्सौल, वीरगंज, बारा, पर्सा, रौतहट और अन्य सीमावर्ती बाजारों पर भी पड़ा था। व्यापारिक गतिविधियां धीमी हो गई थीं और बाजारों में सन्नाटा छा गया था।
-व्यापारिक संगठनों ने किया स्वागत
पूर्वी चंपारण के रक्सौल और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापारिक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। व्यापारिक प्रतिनिधियों का कहना है कि इससे भारत-नेपाल के पारंपरिक “बेटी-रोटी” संबंध और मजबूत होंगे तथा दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।उन्होंने उम्मीद जताई कि नेपाल सरकार भविष्य में इस अंतरिम आदेश को स्थायी रूप से लागू करने की दिशा में भी कदम उठाएगी।
