एस एस काॅलेज में चल रहे बहु विषयक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का हुआ समापन।

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जहानाबाद (बिहार) से ब्यूरो चीफ मनोहर सिंह का रिपोर्ट।

जहानाबाद -जिले के एस एस काॅलेज में 19 से 21 फरवरी 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय बहु-विषयक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार “सीमाओं से परे: तेज़ी से बदलती वैज्ञानिक दुनिया के लिए बहु-विषयक शिक्षा और अनुसंधान” का आज अत्यंत गरिमामय, प्रेरणादायी एवं भव्य वातावरण में सफलतापूर्वक समापन हुआ। हाइब्रिड माध्यम में संपन्न इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन ने ज्ञान-संवाद, नवाचार, समन्वित चिंतन तथा अकादमिक उत्कृष्टता की एक प्रभावशाली मिसाल प्रस्तुत की। तीन दिनों तक महाविद्यालय परिसर बौद्धिक ऊर्जा, शोधपरक विमर्श, शैक्षणिक अनुशासन और सुव्यवस्थित प्रबंधन से उद्भासित रहा।
इस शैक्षणिक महोत्सव का आयोजन टाउकान रिसर्च एंड डेवलपमेंट, बंगलुरू के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसके निदेशक डॉ. केतन कुमार मिश्रा हैं। समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) बी. के. मंगलम की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान की।


अपने विचारोत्तेजक उद्बोधन में मुख्य अतिथि ने कहा कि वर्तमान युग पारंपरिक ज्ञान-सीमाओं को तोड़कर अंतःविषय एवं समन्वित दृष्टिकोण अपनाने का युग है। विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और मानविकी के बीच सुदृढ़ संवाद स्थापित किए बिना वैश्विक चुनौतियों का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने बहु-विषयक अनुसंधान को नवाचार का आधार तथा समाजोपयोगी ज्ञान-सृजन का सशक्त माध्यम बताते हुए युवाओं से शोध में रचनात्मकता, नैतिकता एवं उत्कृष्टता को आत्मसात करने का आह्वान किया। डिजिटल युग में पारदर्शिता, अकादमिक ईमानदारी एवं अनुसंधान की विश्वसनीयता को उन्होंने शिक्षा की आधारशिला बताया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज, औरंगाबाद के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) सुधीर कुमार मिश्रा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की मूल भावना को रेखांकित करते हुए कहा कि बहु-विषयक, लचीली एवं शोधोन्मुख शिक्षा ही भविष्य की सुदृढ़ नींव है। उन्होंने समन्वित विज्ञान, उभरती प्रौद्योगिकियों, वैश्विक स्वास्थ्य और सतत विकास जैसे क्षेत्रों को समय की आवश्यकता बताते हुए ऐसे अकादमिक मंचों को ज्ञान-विनिमय और नवाचार की संस्कृति के संवाहक के रूप में अभिहित किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) दीपक कुमार ने इस संगोष्ठी को संस्थान की शैक्षणिक प्रतिबद्धता, शोध-संकल्प और गुणवत्ता-उन्मुख दृष्टि का प्रतीक बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन अकादमिक संवाद को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने बताया कि
इस मौके पर आगत अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर किया गया।
तीन दिनों तक आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सामाजिक न्याय, भाषायी अध्ययन, सांस्कृतिक विमर्श, पर्यावरणीय चुनौतियाँ, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नवाचार जैसे विविध विषयों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। प्रत्येक प्रस्तुति के उपरांत आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्वानों द्वारा दिए गए रचनात्मक सुझावों और समीक्षात्मक टिप्पणियों ने विमर्श को और अधिक समृद्ध, प्रासंगिक और सारगर्भित बनाया।
कार्यक्रम में साइंस फॉर सोसाइटी, पटना के अध्यक्ष प्रो. (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार तथा हेरिटेज सोसाइटी, पटना के महानिदेशक डॉ. अनंताशुतोष द्विवेदी सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। उल्लेखनीय है कि भारतीय इतिहास एवं संस्कृति के विश्वकोश कहे जाने वाले डॉ. अनंताशुतोष द्विवेदी तथा वैज्ञानिक चेतना के अग्रदूत प्रो. अरुण कुमार को क्रमशः वर्ष 2025 एवं 2026 के लिए “डा. रघुवंश सिंह लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड” से सम्मानित किया गया।
पर्यावरणीय चेतना की दिशा में महाविद्यालय की अभिनव पहल विशेष आकर्षण का केंद्र रही। अतिथियों ने परिसर में वृक्षों एवं पौधों पर लगाए गए क्यूआर कोड का अवलोकन एवं स्कैन कर डिजिटल वृक्ष-प्रबंधन की इस पहल की सराहना की तथा ईको क्लब, एस.एस. कॉलेज, जहानाबाद द्वारा किए जा रहे प्रयासों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय बताया।
आयोजन के दौरान “ग्रीन फ्रीक्यूएंसी” नामक महाविद्यालय के रेडियो चैनल का भी शुभारंभ किया गया, जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता से संबंधित कार्यक्रमों का नियमित प्रसारण किया जाएगा।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे डीएवी स्कूल के प्राचार्य डॉ. के. के. पाण्डेय सहित डॉ. नेहा सिंह, डॉ. कंचन कुमारी, डॉ. भावना निगम एवं डॉ. कुमारी निमिषा ने भी अपने विचार साझा किए। आयोजन समिति के सक्रिय सदस्यों को उनके योगदान के लिए स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रिति रानी ने किया। इस अवसर पर हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुत नृत्य एवं संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियों ने वातावरण को भावमय बना दिया। वहीं
धन्यवाद ज्ञापन समन्वयक डॉ. विनोद कुमार राय ने किया।