नीतीश ने चुनाव आयोग को अपना स्टाफ बना लिया, BJP ने सुबह–सवेरे लगाया बड़ा आरोप, जेडीयू ने भी दिया जवाब

बिहार

बिहार में आगामी 5 दिसंबर को कुढ़नी विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। इसके साथ ही कई जगहों पर पंचायत उपचुनाव होने हैं।  इसके साथ ही कुछ दिनों में नगर निकाय चुनाव का भी एलान होना है। जिसको लेकर अब अंतिम समय में सभी राजनीतिक दलों के कद्दावर नेता कुढ़नी में कैंप करने में गट गए हैं। वहीं, इस चुनाव से पहले बिहार भाजपा के प्रदेश अध्य्क्ष संजय जायसवाल ने चुनाव आयोग पर ही सवाल उठाया है।  उन्होंने कहा है कि अब चुनाव आयोग साफ़ तरीके से काम न करके बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दफ्तर का कर्मचारी बनकर काम कर रहा है।

दरअसल, भाजपा के प्रदेश अध्य्क्ष संजय जायसवाल ने यह हमला आदर्श आचार सहिंता को आधार बनाते हुए बोला है।  उन्होंने कहा है कि, जब हम हमारे दाल के नेता किसी कार्यक्रम में पिछले 6 महीने से बानी हुई सड़क का उद्घाटन करना चाहते हैं तो उस जिले के जिलाधिकारी हमें नियम, कायदा और आदर्श आचार सहिंता के बारे में समझया जाता है। जबकि बिहार सरकार के लोग ऐसा करते हैं तो आदर्श सहिंता का नियम कानून तख्ते पर रखा जाता है। 

इसके आगे संजय जायसवाल ने पिछले दिनों राजधानी पटना के गांधी मैदान में बांटें गए नियुक्ति पत्र को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री,उपमुख्यमंत्री ,सभी विभागों के सचिव खुलेआम  राजधानी में  पुरानी नौकरियों को नया बताकर नियुक्ति पत्र बांटते हैं। लेकिन, निर्वाचन आयोग इन पर आदर्श आचार सहिंता लागु नहीं करता है। उन्होंने एक और उदाहरण देते हुए कहा कि, गया जी मे नल जल योजना का सार्वजनिक उद्घाटन एवं सभा करते हैं । इसका संज्ञान लेने की सुध निर्वाचन आयोग को नहीं है।

इसके आलावा उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग से सवाल पूछते हुए कहा कि, आयोग को यह बताना चाहिए कि जब सांसद और विधायक कोई भी कार्यक्रम, आदर्श आचार संहिता के तहत शहर में नहीं कर सकते हैं तो किस नियम के तहत मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं विभिन्न विभागों के सचिव सार्वजनिक सभा कर पटना में नौकरियां बांट रहे हैं एवं बोधगया में नदी जल योजना का उद्घाटन कर रहे हैं। क्या यह नगर में लगे आदर्श आचार संहिता में नहीं आता है। अगर यह आता है तो अभी तक मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री के ऊपर एफआईआर निर्वाचन आयोग ने क्यों नहीं किया है? और अगर यह नहीं आता है तो किस नियम से सांसद और विधायकों को नगर में किसी भी कार्य पर आदर्श आचार संहिता की बात की जा रही है?

वहीं, संजय जायसवाल के इस आरोप पर पलटवार करते हुए जदयू के प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा है कि भाजपा के प्रदेश अध्य्क्ष राजनीतिक रूप से दिवालिया हो चुके हैं। झा ने कहा कि, जदयू और बिहार सरकार पर आरोप लगाने से पहले उनको अपने गिरेबान में झांक कर देखना चाहिए। उनकी सच्चाई तो पूरा देश जानता है कि, किस तरह से उन्होंने संबैधानिक संस्थाओं को अपने अधिक बनाकर रख लिया है। 

इसके आगे उन्होंने कहा कि, हमारी सरकार के ऊपर जो भी आरोप लगाया जा रहा है, उसमें कहीं कोई भी सच्चाई नहीं है।  इनको पहले नियमों के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। लेकिन, ये डर गए हैं और इसी डर के कारण यह बातें कह रहे हैं। उनको मालूम चल गया है कि, हम बिहार में शून्य हो गए हैं और आगामी चुनाव में भी हार रहे हैं। इसलिए वो ऐसा बोल रहे हैं। 

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