चंपारण : नाइट ब्लड सर्वे के दौरान 16 हजार 800 लोगों के रक्त नमूने संग्रह किए गए

बिहार
  • 13 हजार 800 की हो चुकी है माइक्रोस्कोपी जाँच जिनमें 177 मिले पॉजिटिव

मोतिहारी / राजन द्विवेदी।

फाइलेरिया संक्रमित क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। जिसके कारण पैर का सूजन (हाथीपांव), हाथ का सूजन, अंडकोष का सूजन (हाइड्रोसील), महिलाओं के स्तन एवं जननांग में सूजन होता है। जिले के सीएस डॉ अंजनी कुमार ने बताया कि जिले में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत नाइट ब्लड सर्वे चलाया गया,जिसमें जिले के 27 प्रखंडों    के दो स्थायी व अ स्थायी साइटों पर रात्रि 8:30 से 12:00 बजे तक 20 या 20 साल के ऊपर के व्यक्तियों का ब्लड सैम्पल लिया गया।

फाइलेरिया जाँच कार्यक्रम में प्रशिक्षित एलटी, आशा ,बीएच एम/बीसीएम/सीएचओ/ जीएनएम/ एएनएम/भीभीडीएस की टीम ने काफी सहयोग किया।डीभीडीसीओ डॉ शरत चन्द्र शर्मा ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे के दौरान 16 हजार 800 लोगों के रक्त नमूने संग्रह किए गए। इसमें 13 हजार 800 लोगों के रक्त की माइक्रोस्कोपी जांच की जा चुकी है जिसमें   177 लोग फाइलेरिया से संक्रमित पाए गए हैं। भिडिसीओ सत्यनारायण उराँव,धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि सर्वाधिक फाइलेरिया संक्रमित चकिया प्रखंड के चकबरा में 15, लखनी मधुबन में 11, हरसिद्धि प्रखंड में 19, चिरैया में 17, मेहसी में 23, पकड़ीदयाल में 18 संक्रमित पाए गए है।


सीएस डॉ कुमार ने बताया कि दिसम्बर के प्रथम सप्ताह में एमडीए कार्यक्रम के शुरू होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि हाथीपांव फाइलेरिया का एक गंभीर लक्षण है। यदि हाथीपांव के शुरुआती लक्षणों को अनदेखा किया जाए तो यह फिर ठीक नहीं होता है। इसलिए फाइलेरिया से बचाव को दवा सेवन करना जरूरी है।

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